औरंगाबाद में मजदूर के परिवार से मिले कांग्रेस जिलाध्यक्ष, मिल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की मांग

बुलंदशहर : जिले के औरंगाबाद क्षेत्र स्थित भंडोरिया गांव की अनामिका शुगर मिल में कामदार पद पर कार्यरत मजदूर शरीफ अल्वी द्वारा मिल प्रबंधन की प्रताड़ना और गरीबी से तंग आकर आत्महत्या करने के मामले में रविवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष जियाउर्रहमान औरंगाबाद पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की तथा कांग्रेस की ओर से पीड़ित परिवार को राशन उपलब्ध कराया।कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने मिल प्रबंधन पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मृतक के परिवार को कांग्रेस हर स्तर पर आवाज उठाकर न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीड़ित परिवार ने बताया कि मिल के अधिकारी नीरज उज्ज्वल किसानों को दी गई दवा का भुगतान शरीफ अल्वी से मांग रहे थे और न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही थी। मृतक के बेटे शाहनवाज ने बताया कि पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला, जिससे घर में आटा तक नहीं था। उनका आरोप है कि अगर मिल द्वारा लगातार प्रताड़ना न की जाती, तो शरीफ अल्वी आज जीवित होते।जियाउर्रहमान ने कहा कि शरीफ अल्वी की मृत्यु मिल प्रबंधन के शोषण और आकंठ भ्रष्टाचार का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों पर किसानों को दवा बेचने का लाखों रुपये का टारगेट थोपना न केवल शर्मनाक बल्कि नियमविरुद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में मजदूरों का खुलेआम शोषण हो रहा है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को मिल में एक नौकरी और समुचित आर्थिक मुआवजा नहीं दिया गया, तो कांग्रेस व्यापक आंदोलन करेगी।इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष सुभाष गांधी, समाजसेवी अब्दुल रशीद, नगर अध्यक्ष अली मुराद नकवी, नईम मंसूरी, स्वामी हरेंद्र मौजूद रहे ।कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर उठाया मजदूर की आत्महत्या का मुद्दा बुलंदशहर । कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक हैंडल से औरंगाबाद के गांव भंडोरिया निवासी शरीफ अल्वी की गरीबी से आत्महत्या का मामला उठाया । कांग्रेस ने अपने आधिकारिक पेज से लिखा कि “मेरे घर पर आटा भी नहीं है” आर्थिक तंगी से जूझ रहे मोहम्मद शरीफ ने ये बात सुसाइड नोट में लिखी और अपनी जान दे दी। ये घटना बताती है कि देश के लोग किन मुश्किल हालातों में गुजारा कर रहे हैं। उनकी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो रहीं। लेकिन मोदी सरकार पर इन बातों का फर्क नहीं पड़ता, वो तो बिके हुए मीडिया और झूठे PR के जरिए अपनी छवि चमकाने में लगी है। नरेंद्र मोदी को बस चंद पूंजीपति मित्रों की फिक्र है।कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर यह मामला उठाने से प्रशासन सतर्क हो गया है।

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