अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन

बुलंदशहर : में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के द्वारा ,विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में महाकवि डॉ देवेन्द्र देव मिर्जापुरी का जन्मदिवस पर दिनाँक 10.01.26 को हिन्दी सहित्य परिषद् भवन ,मोती बाग बुलंदशहर में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन श्री रमेश ‘प्रसून’की अध्यक्षता में किया गया तथा भव्य कार्यक्रम में मुख्य कोषधिकारी डॉ. अनिल कुमार यादव जी मुख्य अतिथि रहे। आगरा से पधारे कवि श्रेष्ठ गणेश शर्मा ‘विद्यार्थी’ को देवेन्द्र देव मिर्जापुरी ‘सारस्वत’ सम्मान से अलंकृत किया गया। विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुधा गोयल , महाकवयित्री श्रीमती मधु चतुर्वेदी तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश शर्मा, तथा डॉ. यतेंद्र कटारिया “विद्यालंकार”, डॉ. ललित कुमार सिंह व बरेली से आये वरिष्ठ कवि श्री चैतन्य चेतन, गाजियाबाद से प्रसिद्ध ग़ज़लकर श्री अनिमेष ‘आतिश’, एवं प्रसिद्ध कवि स्वदेश यादव,श्री रामनपाल सिंह एवं प्रतिष्ठित कवि डॉ.अक्षय प्रताप,श्री दिव्यहंस दीपक, दादरी से आयी कुमारी इशिका ‘ईशु’ व संयोजक कवि श्री अरविन्द भाटी,व कवयित्री संगीता अहलावत,तथा हरित तोमर अनुराग तिवारी रहे।श्री शम्भु दत्त त्रिपाठी, श्री किशोर अग्रवाल, वीरेन्द्र चौहान ‘हूस’ श्री कृष्ण कुमार शर्मा, आचार्य नरेन्द्र सिंह,श्रीमती मधु वार्ष्णेय व श्रीमती मधु मिश्रा, डॉ. भास्करन यादव,आदि की गरिमामई उपस्थिति में कार्यक्रम का सुसंचालन डॉ. अलोक बेजान व डॉ. कमलकिशोर भारद्वाज ने सफलता पूर्वक किया।विख्यात कभी श्री रमेश प्रसून ने कहा कि –“राष्ट्र का उत्थान हिन्दी से, राष्ट्र का सम्मान हिन्दी से हो रही है विश्वभर में अब, राष्ट्र की पहचान हिन्दी से”।देवेन्द्र देव मिर्जापुरी ने कहा कि —-हिन्द को जयहिंद कहें भाषा का करें सम्मान, भारती का भाल हिन्दी भाषा से सजाइये।” सभी कवियों ने भावपूर्ण रचना पढ़ी। कवि अरविन्द संवेदित ने व्यंग रचना पढ़ी।दादरी से आयी ‘इशिका ईशु’ ने हिन्दी पर रचना पढ़ी।गाज़ियाबाद से श्री अनिमेष शर्मा’आतिश ‘सिकंन्द्राबाद से आये दिव्यहंस दीपक व हिन्दी के विद्वान् डॉ. भास्करन यादव व जनपद के साहित्यकार एवं कवि ‘डॉ.नवीन चतुर्वेदी’ डॉ. कमल किशोर भारद्वाज व श्री किशोर अग्रवाल ने राष्ट्र प्रेम की डॉ. मधु मिश्रा एवं अन्य उपस्थित रहे।विख्यात कभी रमेश प्रसून ने कहा कि राष्ट्र का उत्थान हिन्दी से, राष्ट्र का सम्मान हिन्दी से हो रही है है विश्वभर में अब, राष्ट्र की पहचान हिन्दी से.संगीता अहलावत ने कहा कि – काश पुराने दिन जो गुजरे वापस फिर से आ जायें “”

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