भागवत कथा भव सागर से तारने में सक्षम — आचार्य शैलेन्द्र शास्त्री कलश यात्रा के साथ भागवत महोत्सव का शुभारंभ

औरंगाबाद : बुलंदशहर वृंदावन धाम से पधारे भागवताचार्य शैलेन्द्र शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा प्राणी मात्र को ज्ञान और वैराग्य का संदेश देती है।भागवत कथा श्रवण और उसका अनुसरण करने से मनुष्य भव सागर से पार उतर जाता है।आचार्य शैलेन्द्र शास्त्री सोमवार को चामुंडा मंदिर परिसर में आयोजित भागवत महोत्सव के प्रथम दिवस व्यास गद्दी से सैंकड़ों नर नारियों को भागवत कथा के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से धर्म लाभ करा रहे थे। धुंधकारी राक्षस की कथा और उसके मोक्ष प्राप्त करने की कथा सुनाते हुए उन्होने कहा कि धुंधकारी ने किसी संत के कहने पर अपने पुत्र का नाम नारायण रखा था। अपने कुकृत्यों और अत्याचारों के चलते अंत समय में यमदूतों के त्रास से भयभीत होकर उसने अपने पुत्र को मदद के लिए पुकारा। अंत समय में नारायण का‌ नाम लेने भर से ना केवल यम दूतों की भयंकर गर्जना बंद हो गई बल्कि नारायण के दूत उसे नारायण के धाम ले गए जहां प्रभु ने उसे मोक्ष प्रदान किया।श्री शास्त्री ने सद्कर्म करने पर जोर देते हुए कहा कि सद्कर्म और अच्छे आचरण से ही मनुष्य जीवन सफल होता है। चौरासी लाख योनियों में सिर्फ मनुष्य जीवन में ही मोक्ष प्राप्त करना संभव है।इससे पूर्व सैकड़ों पीत वस्त्र धारी महिलाओं ने मंगल कलश सिर पर धारण कर कलश यात्रा निकाली। चामुंडा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर बालका मोड़,भावसी रोड, वाल्मीकि चौक, स्याना सिकंदरा, मेन बाजार, जहांगीराबाद रोड होते हुए कलश यात्रा पुनः चामुंडा मंदिर परिसर पहुंच कर संपन्न हुई। व्यवस्थाओं में मंदिर कमेटी अध्यक्ष जसवंत सिंह सैनी कोषाध्यक्ष जवाहर लाल सैनी, विवेक, अरुण,सुरेश, चंद्र प्रकाश शर्मा, अर्जुन सोनी, कर्मवीर भड़ाना,रजनीश, विशाल, संजय गिरी, रमेश लोधी,पवन थौर अमरपाल सैनी ने सहयोग किया।

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