छात्र इंटरमीडिएट परीक्षा में 33 प्रतिशत अंक पर होते पास तो टेट व सीटेट में 33 प्रतिशत अंक पर क्यों नहीं होते पास – शैलेंद्र कुमार एडवोकेट

उत्तर प्रदेश : सरकार द्वारा जारी छात्र-छात्राओं को टेट व सीटेट परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक पर पास होने के नियम के विरुद्ध लेंगे न्यायालय के शरण शिक्षक भर्ती में सरकार द्वारा जारी किए जा रहे नए नियमों से छात्र-छात्राओं के साथ हो रहा अन्याय*बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में शिक्षक बनने के लिए छात्र-छात्राओं को टेट और सीटेट की परीक्षा 55 प्रतिशत अंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति एवं 60 प्रतिशत अंक सामान्य वर्ग को पास करना अनिवार्य किया गया। परीक्षा को पास करने के बाद भी छात्र-छात्राओं को एक साक्षात्कार देना पड़ता है और इसके उपरांत एक मेरिट लिस्ट लगाई जाती है जिसके अनुसार छात्र-छात्राओं का शिक्षक भर्ती में सिलेक्शन होता है। इतना सब करने के बाद छात्र-छात्राएं शिक्षक बन पाते हैं जिसमें टेट और सीटेट को मात्र पास करना है तो उसे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा की तरह 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर ही पास क्यों नहीं माना जाए।शैलेंद्र कुमार एडवोकेट द्वारा बताया गया कि जनपदों में 02 तरह के नियम हाइस्कूल,इंटर, बी ए,और एम ए में पास होने के लिए पासिंग अंक 33 और 40 प्रतिशत है और टेट और सीटेट में पास होने के लिए पासिंग अंक 55 और 60 प्रतिशत क्यों ? जिसमें बदलाव होना छात्र-छात्राओं के भविष्य एवं रोजगार प्राप्त करने हेतु अति आवश्यक है। ऐसे में सरकार के नियमों के विरुद्ध एवं बदलाव लाने के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद/ प्रयागराज में रिट दायर करनी छात्र-छात्राओं के न्यायहित में होगा।शिक्षक बनने के लिए इतनी परीक्षा एवं साक्षात्कार को पास करना छात्र-छात्राओं की भविष्य एवं रोजगार के लिए कठिन रास्ता सरकार द्वारा बनाया गया है जिसमें बदलाव लाना जरूरी है,छात्र-छात्राओं को न्याय दिलाने के लिए एवं उनके भविष्य को देखते हुए रोजगार दिलाने हेतु टेट और सीटेट में पास होने के लिए पासिंग अंक को लेकर उच्च न्यायालय में रिट दायर करनी चाहिए।

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