बुलन्दशहर : के वरिष्ठ पत्रकार एवं NDTV से जुड़े रहे समीर अली की चालीसवें के मौके पर शहर के ऊपरकोट स्थित इमामबाड़े में एक भावपूर्ण शोक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पत्रकारिता, समाज, राजनीति और धर्म जगत से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर मरहूम को श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा के दौरान दिल्ली से तशरीफ़ लाए प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे रुशैद रिज़वी, अली अब्बास नकवी,मशहूर नौहा खान अली नक़ी, जावेद रजा जैदी, फैजान रज़ा, इशरत अली, और शब्बीर अब्बास,ने मरहूम की मग़फ़िरत और इसाले सवाब के लिए मजलिस पढ़ी उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समीर अली का जीवन सच्चाई, ईमानदारी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पत्रकार का सबसे बड़ा धर्म सच के साथ खड़ा रहना होता है, और समीर अली ने अपने जीवन में इस सिद्धांत को पूरी निष्ठा से निभाया। सभा में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि समीर अली केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे आम लोगों की आवाज़, पीड़ा और सवालों को मंच तक पहुंचाने वाले एक संवेदनशील इंसान थे। वे अपने काम के प्रति गंभीर, लेकिन व्यवहार में बेहद सरल और विनम्र थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी निष्पक्षता और निर्भीकता हमेशा याद रखी जाएगी।इस शोक सभा में धर्मगुरुओं के साथ-साथ पत्रकार साथी, राजनेता, समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि समीर अली की कमी न केवल उनके परिवार, बल्कि बुलंदशहर के पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कार्यक्रम के अंत में मरहूम की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक दुआ की गई और उनके परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की गई। शोक सभा का वातावरण ग़मगीन जरूर था, लेकिन समीर अली की यादों और उनके योगदान ने उसे सम्मान और गरिमा से भर दिया।
इमामबाड़े में आयोजित शोकसभा में याद किये गए पत्रकार समीर अली
