बुलंदशहर : में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए कथित ट्रेड डील को देश की संप्रभुता, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों पर सीधा हमला बताते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह के आवाह्न पर आम आदमी पार्टी बुलंदशहर ने कलेक्ट्रेट मुख्यालय पर एक साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया मोदी सरकार का पुतला फूंका,अमेरिकी भारत व्यापार संधि की प्रतियों को जलाया और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह समझौता भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी हितों के लिए खोलने, रूस से सस्ता तेल खरीद बंद कराने, व्यापारिक असमानता थोपने और देश के स्वाभिमान को गिरवी रखने की साजिश है, जिसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।इस दौरान .जिलाध्यक्ष शैलेन्द्रसिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का कृषि बाज़ार अमेरिकी किसानों के लिए खोलकर देश के किसानों के डेथ वारंट पर साइन किया है, इसको हम लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे! यह ट्रेड डील नहीं, थ्रेट डील है। नई ट्रेड डील के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका 18 प्रतिशत टैक्स लगाएगा जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में टैक्स फ्री एंट्री देकर देश के करोड़ों किसानों के साथ अन्याय किया गया है। मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर भारतीय किसानों के डेथ वारंट पर साइन कर दिए हैं। क्या सरकार बताएगी कि देश का स्वाभिमान अमेरिका के पास क्यों गिरवी रखा जा रहा है? सरकार अपने निजी हितों और अडानी-अंबानी को बचाने के लिए देश के किसानों और स्वाभिमान को अमेरिका के हाथों गिरवी रख रही है! देश के अन्नदाता के हितों का सौदा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।प्रदेश प्रवक्ता विकास शर्मा ने कहा कि सरकार ने रूस जैसे पुराने मित्र से सस्ता तेल खरीदने के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से ₹80,000 करोड़ महंगा तेल खरीदने का फैसला किया है। इस भारी खर्च का खामियाजा आम जनता को भुगतना होगा। आखिर किसकी जेब भरने के लिए यह सौदा किया गया? अगर भारत रूस से तेल खरीदेगा तो अमेरिका 25% टैक्स लगा देगा। क्या यह देश की संप्रभुता से समझौता नहीं है? क्या हम चोर हैं? क्या हम बेईमान हैं जो अमेरिका हमारे ऊपर निगरानी रखेगा? अमेरिका के कहने पर हमने अपने पुराने दोस्त रूस का साथ छोड़ दिया और बदले में हमारे व्यापारियों को क्या मिला? उन्होंने कहा कि इस ट्रेड डील के पर्दे के पीछे बहुत सारे खेल चल रहे हैं। कल तक ट्रंप को दुनिया का सबसे बेकार आदमी कहने वाली मीडिया आज उनकी भाषा क्यों बोल रही है? आखिर ‘अज्ञात’ शर्तों के नाम पर क्या छिपाया जा रहा है?.आप नेता धीरज सिंहने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने ऑयल रिफाइनरीज को आदेश दिया है कि वह अब रूस से नहीं अमेरिका से तेल खरीदें। यह आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के बाद आया है। आज पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछ रहा है कि आखिर Trump होता कौन है, जो यह बताए कि भारत किससे क्या खरीदेगा? वहीं मोदी जी की ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रंप की हर बात मान रहे हैं?उन्होंने कहा की अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद कर दिया, जिससे देश को ₹1,53,000 करोड़ की बचत हो रही थी। क्या भारत अब अपने फैसले खुद नहीं ले सकता? हमारी संप्रभुता और स्वाभिमान का सौदा क्यों किया जा रहा है ? रूस जैसे पारंपरिक मित्र से तेल न खरीदने की शर्त भारत की संप्रभुता का अपमान है।आप नेता एड तेजपाल सिंह ने सवाल किया कि भारत के कपड़ों पर 18% टैक्स और बांग्लादेश के कपड़ों पर 0%? यह कैसी ट्रेड डील है? मोदी ने भारत का सम्मान गिराकर युगांडा, वेनेज़ुएला, घाना और बांग्लादेश जैसे देशों से भी नीचे कर दिया। क्या अडानी पर भ्रष्टाचार के आरोपों और ‘एपस्टीन फाइल्स’ में चौंकाने वाले खुलासों के दबाव में आकर प्रधानमंत्री विदेशी दौरे और समझौते कर रहे हैं? एप्स्टीन फाइल्स’ और अमेरिका की धमकियों पर चुप्पी क्यों? सदन में जवाब देने के बजाय भावनाओं का सहारा लेना बंद करें। देश जवाब चाहता है! जनता पारदर्शिता चाहती है।प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मांग की कि देश विरोधी मोदी–ट्रंप ट्रेड डील को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए जिससे देश के करोड़ों किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।इस दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा सख्ती की गई, जिसे पार्टी ने अलोकतांत्रिक और दमनकारी रवैया बताते हुए कड़ी निंदा की। आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कहा कि देश के स्वाभिमान, आर्थिक संप्रभुता और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा और सरकार की हर जनविरोधी नीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।इस दौरान एड तेजपाल सिंह धीरज सिंह. .मनोज वैध.अर्जुन सिंह राघव. इन्द्रेश. राहतभाई. संजयमित्तल. एड धर्मेंद्रसिंह मुकुल लोधी .अन्य लोगमौजूदथे।
अज्ञात शर्तों और छिपे समझौतों पर देश जवाब
