बुलंदशहर

शिशु को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध पिलाएं, जीवन स्वस्थ बनाएं 

स्तनपान सप्ताह के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित

बुलंदशहर। नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर मां अपना पहला गाढ़ा पीला दूध अवश्य पिलाएं, क्योंकि इसमें कोलस्ट्रोम होता है जो बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। मां का दूध बच्चे के लिए पहला टीका होता है। जन्म से छह माह तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ स्तनपान करवाना चाहिए। छह माह से दो साल की उम्र तक पूरक आहार देने के साथ-साथ स्तनपान भी कराना आवश्यक है। मुख्य चिकित्सा कार्यालय में विश्व स्तनपान सप्ताह के अन्तर्गत आयोजित एक दिवसीय गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने गर्भवती व धात्री महिलाओं को लेकर अपनी-अपनी बात रखी हैं। गोष्ठी में अपर निर्देशक डा. राजेंद्र सिंह, मंडल सर्विलांस अधिक डा. अशोक तालियान सहित स्वास्थ्य टीम स्तनपान के प्रति जागरूक किया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनय कुमार सिंह ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा- मां का गाढ़ा पिला दूध नवजात शिशु के लिए अमृत के समान होता है। मां का पहला दूध यह बच्चे को स्वस्थ बनाता है। इसलिए प्रसव के उपरांत नवजात शिशु के लिए हर हाल में स्तनपान जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान आई महिलाओं को स्तनपान के प्रति जगरूक किया गया। उन्होंने बताया -राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार जिले में तीन साल से कम उम्र के महज 38.8 फीसदी बच्चों ने ही जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान किया है। यह चिंता का विषय है। इस व्यवहार को बदलना होगा। इसी सर्वेक्षण के मुताबिक 71.2 फीसदी बच्चों ने छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान किया है। ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देना होगा। स्तनपान का सही व्यवहार अपनाने वाली माताओं के बच्चों में आगे चल कर रक्त कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। मां के दूध में कई प्रकार के प्राकृतिक और पौष्टिक तत्व होते हैं जो बच्चे को सुपोषित बनाते हैं। इससे शिशु की बौद्धिक क्षमता बढ़ती है और मां के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता और भी मजबूत होता है।

जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक डा. ज्योत्सना कुमार ने बताया- अस्पताल में होने वाले प्रसव के उपरांत नवजात शिशु को स्तनपान कराया जाता है। यहां मां और परिजनों को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को स्तनपान के सही तरीके के बारे में भी समझाया। गोष्ठी में यह संदेश दिया गया कि अति विषम परिस्थिति को छोड़कर स्तनपान जारी रखना है। इससे नवजात  शिशु के जीवन की रक्षा होती है और बीमारियों से भी बचाव होता है। 

ध्यान रखने योग्य बातें….

• बच्चा जब स्तनपान शुरू करता है तभी दूध की मात्रा भी बढ़ती है । जन्म के बाद दसवें दिन तक दूध की मात्रा ढाई गुना बढ़ जाती है।

• स्तनपान का समुचित व्यवहार निमोनिया और डायरिया से बचाव करता है जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।

• महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या से बचाव में स्तनपान की अहम भूमिका है। यह बच्चे को इंफेक्शन से भी बचाता है।

• बच्चे को स्तनपान कराते समय मां का हाथ साफ-सुथरा होना चाहिए और विशेष परिस्थितियों में स्तन से दूध निकाल कर भी पिलाया जा सकता है।

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