अगौता थाना क्षेत्र के गांव नगला ढकौली में दबंगों द्वारा जमीन पर अवैध कब्जा करने पर नहीं की कोई कार्यावाही जिलाधिकारी एवं एसडीएम सदर को गलत रिपोर्ट देकर किया गया गुमराह

बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के अनेक विभागों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा मंत्री, विधायक के आदेशों का पालन नहीं करने की पहले भी खबरें सामने आई है जिसपर उनके विरुद्ध कार्यावाही भी होती दिखाई दी गई है। परंतु बुलंदशहर की सदर तहसील में एक ऐसा मामला देखने को मिला है जहां मंत्री, विधायक के आदेश का उल्लंघन करने पर भी संबंधित कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके कारण पीड़ित डर-डर की ठोकरे खा रहा। और अधिकारियों के लगातार चक्कर लगा रहा। लेकिन उसे न्याय नहीं मिल रहा। बता दें कि बुलंदशहर की सदर तहसील के अंतर्गत अगौता थाना क्षेत्र में गांव नगला ढकौली निवासी मीर सिंह पुत्र लिक्खी सिंह सेवानिवृत प्रधान सहायक कलेक्ट्रेट बुलंदशहर की जमीन पर गांव सजापुर धमेड़ा थाना कोतवाली देहात निवासी शब्बीर खान पुत्र शेर खान, मोहब्बत पुत्र शब्बीर, दलवीर पुत्र जीवन तथा प्रदीप, पुनीत पुत्रगण दलवीर दबंग लोगों द्वारा दबंगई से अवैध कब्जा कर लिया, उक्त लोगों ने गाली गलौज मारपीट एवं जान से मारने की धमकी दी गई। जिसकी शिकायत मीर सिंह द्वारा पुलिस, शासन, प्रशासन के उच्च अधिकारियों से एवं विधायक और मंत्री से की।विधायक राजपाल सिंह बालियान नेता विधान मंडल दल राष्ट्रीय लोक दल उत्तर प्रदेश के द्वारा नियम 51 के अंतर्गत विधानसभा उत्तर प्रदेश में उक्त के संबंध में प्रश्न उठाया। जिस पर शासन को अखियां भेजी गई की उप जिलाधिकारी एवं क्षेत्राधिकार की संयुक्त टीम गठित कर प्रकरण का निस्तारण कराया जाए किंतु प्रार्थी की समस्या का निस्तारण नहीं कराया गया। नरेंद्र कश्यप राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ ने पत्र एसडीएम सदर बुलंदशहर को लिखकर निर्देशित किया गया कि उक्त के संबंध में अवैध कब्जे को हटाया जाए। किंतु प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं की गई। डॉ अरुण कुमार प्रभारी मंत्री जनपद बुलंदशहर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार वन पर्यावरण जंतु उद्यान विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ ने जिला अधिकारी को निर्देशित दिया कि उप जिलाधिकारी सदर एवं क्षेत्राधिकारी पुलिस उक्त की समस्या का निस्तारण करें। जिसपर भी समस्या का निस्तारण नहीं कराया गया।मीर सिंह द्वारा उप जिला धिकारी तहसील सदर बुलंदशहर के समक्ष भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया जिसपर एसडीएम द्वारा आदेशित किया गया कि नायब तहसीलदार नगर एवं एसएचओ थाने से पर्याप्त पुलिस बल को लेकर उक्त की समस्या का निस्तारण करायें किंतु नायब तहसीलदार ललित नारायण प्रशांत ने समस्या का निस्तारण नहीं कराया। नायब तहसीलदार नगर के कार्यालय का लगातार पीड़ित लग रहा चक्कर लेकिन समस्या का नहीं किया जा रहा निस्तारण। पीड़ित द्वारा नायब तहसीलदार सदर ललित नारायण प्रशांत पर यह भी आरोप लगाया कि उक्त कार्य करने के बदले अवैध रूप से रिश्वत की मांग की गई। तथा यह भी कहा कि ऐसे विधायक, मंत्री के आदेशों का मैं पालन नहीं करता कितने आदेश आते हैं सबको मैं ऐसे ही रद्दी में डाल देता हूं तुम्हारा कार्य जब तक नहीं होगा जब तक पैसे नहीं दोगे। जिसकी शिकायत पीड़ित वीर सिंह द्वारा मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से की।अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन पीड़ित की समस्या का निस्तारण करते हैं या नहीं या ऐसे ही पीड़ित डर-डर के टुकड़े खाता रहेगा। इसी तरह विधायक, मंत्री एवं अधिकारियों के आदेश का उल्लंघन होता रहेगा और ऐसे कर्मचारियों पर कार्यवाही होती है या नहीं, सोचने का विषय?

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