शिकारपुर : नगर के सूरजभान सरस्वती विद्या मन्दिर इन्टर कॉलेज में दिनांक 26 जून से 30 जून 2024 तक चलने वाले पांच दिवसीय आचार्य विकास प्रशिक्षण वर्ग का हुआ शुभारम्भ कार्यक्रम का शुभारम्भ सर्वप्रथम विद्यालय के अध्यक्ष विजेन्द्र शर्मा प्रबंधक अनिल कुमार मित्तल एवं प्रधानाचार्य धर्मवीर सिंह तथा विद्यालय के उप प्रधानाचार्य योगेश चन्द्र गुप्ता द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन तथा बाहर से आए हुए सम्मानित शिक्षाविदों का श्रीफल एवं पटका पहना कर किया गया कार्यक्रम को तीन सत्रों में विभाजित किया गया प्रथम सत्र में विद्यालय के प्रबंधक अनिल कुमार मित्तल, ने छात्रों के सर्वांगीण विकास आचार्य की वर्तमान चुनौतियां व उनके समाधान पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किया द्वितीय सत्र में एन. आर. ई. सी. डिग्री कॉलेज खुर्जा के पूर्व प्राचार्य डॉ. के. डी. शर्मा, ने आचार्य विकास एवं कक्षा प्रबंधन के विषय को विस्तार पूर्वक बताते हुए अपने शैक्षणिक जीवन का अनुभव साझा किया अध्यापक अपनी कक्षा को वर्तमान समय में किस-किस तरह व्यवस्थित करें कि छात्रों को अच्छे से अच्छी शिक्षा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर ग्रहण कराई जा सके जिसे वर्तमान में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा छात्र एवं छात्राएं अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकें तृतीय सत्र में शिकारपुर के शिक्षाविद डॉ. प्रमोद कुमार मित्तल, द्वारा वर्तमान समय में शिक्षक को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तथा चुनौतियों को पूर्ण कर शिक्षा क्षेत्र में अपना अहम योगदान कैसे प्रस्तुत करें इस विषय को लेकर उन्होंने अपने अनुभव को सभी के समक्ष प्रस्तुत कर बताया वर्तमान समय के छात्र-छात्राओं की मनोविश्लेषण प्रक्रिया को जानना, समझना, अध्यापक को जरूरी है छात्र-छात्राओं की मनोवैज्ञानिकता क्या है विद्यार्थी एक स्वयं मनोवैज्ञानिक है जो शिक्षक का स्वयं मूल्यांकन कर उसके पद चिन्हो पर चलने के लिए उत्सुक होता है जैसा देखा है वैसा ही वह सीखता है जीवन सीखने की एक सतत प्रक्रिया है इसलिए सभी को अपने जीवन में सीखना और सीखना चाहिए शिक्षक का दायित्व है कि वह स्वयं आत्मनिर्भर बनकर, आत्मविश्वास के साथ अपने विद्यार्थियों को अपने अनुभव से उसके जीवन को उजाला से भर दे एक अच्छे शिक्षक शिक्षक को भावात्मक एवं विचारात्मक शैली के भावों से विद्यार्थी हित में अपना कर्तव्य निर्वहन करे ऐसी ओजस्वी वाणी के साथ तृतीय सत्र का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ इस अवसर पर विद्यालय की 110 आचार्य बंधु एवं आचार्य बहिने मौजूद रही ।

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